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30 March ko konsa divas hai

30 मार्च को कौन-सा दिवस मनाया जाता है? 

हर दिन कुछ न कुछ विशेषता लिए होता है और 30 मार्च भी उन खास दिनों में से एक है जिसे विभिन्न कारणों से स्मरण किया जाता है। यह तिथि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन विश्वभर में कुछ विशेष दिवस मनाए जाते हैं, और भारत के संदर्भ में भी यह दिन कुछ खास घटनाओं से जुड़ा हुआ है। आइए जानें कि 30 मार्च को कौन-कौन से दिवस मनाए जाते हैं और इसका क्या महत्व है।

1. राजस्थान दिवस (Rajasthan Day)

30 मार्च को भारत में "राजस्थान दिवस" के रूप में मनाया जाता है। यह दिन राजस्थान राज्य के गठन की याद में मनाया जाता है। वर्ष 1949 में 30 मार्च के दिन ही राजस्थान एक एकीकृत राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था।

इतिहास और महत्व:

भारत की स्वतंत्रता के बाद देश के विभिन्न रियासतों और छोटे-बड़े राज्यों को एकजुट करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। राजस्थान का गठन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था। पहले इस क्षेत्र को "राजपूताना" कहा जाता था जिसमें लगभग 22 रियासतें थीं, जैसे जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर आदि।

सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों और तत्कालीन नेताओं की पहल से इन सभी रियासतों का विलय करके एक एकीकृत राज्य "राजस्थान" का निर्माण किया गया। यह ऐतिहासिक कार्य 30 मार्च 1949 को पूर्ण हुआ और तभी से इस दिन को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राजस्थान दिवस समारोह:

राजस्थान दिवस के अवसर पर राज्य भर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, परेड, झांकियों और लोकनृत्य आयोजनों का आयोजन किया जाता है। जयपुर में विशेष रूप से कार्यक्रमों की भव्यता देखने को मिलती है। इस दिन राजस्थान की समृद्ध विरासत, परंपराएं, कला और संस्कृति को सम्मानित किया जाता है।

2. डॉक्टर दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि:

30 मार्च को आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि भी होती है। वे भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और धार्मिक नेता थे जिन्होंने 19वीं सदी में वेदों के प्रचार और सामाजिक कुरीतियों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की।

स्वामी दयानंद सरस्वती का योगदान:

उन्होंने 1875 में "आर्य समाज" की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जातिवाद, मूर्ति पूजा जैसी बुराइयों को दूर करना था।

वेदों को जीवन का सर्वोच्च मार्गदर्शक मानते थे और "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas) का नारा दिया।

उन्होंने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह उन्मूलन जैसे सामाजिक सुधारों की पुरजोर वकालत की।

30 मार्च 1883 को उनकी मृत्यु हुई थी और तभी से यह दिन उनकी पुण्य स्मृति में मनाया जाता है।

3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 30 मार्च के अन्य दिवस:

वैश्विक संदर्भ में भी 30 मार्च को कुछ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाते हैं जिनमें से प्रमुख हैं:

a) International Day of Zero Waste (अंतर्राष्ट्रीय शून्य कचरा दिवस):

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 से प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को 'International Day of Zero Waste' के रूप में घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य है लोगों में कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पुनर्चक्रण (recycling) को बढ़ावा देना और पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखना।

इस दिन विभिन्न देशों में प्लास्टिक कचरा नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और सतत जीवनशैली को लेकर सेमिनार, कार्यशालाएं और सफाई अभियान आयोजित किए जाते हैं।

b) Land Day (फिलिस्तीनी भूमि दिवस):

30 मार्च को "Land Day" (भूमि दिवस) भी मनाया जाता है, जो मुख्यतः फिलिस्तीनियों द्वारा मनाया जाता है। यह 1976 की एक घटना की याद में मनाया जाता है जब इज़राइल सरकार ने फिलिस्तीनियों की जमीन अधिग्रहित की थी और इसके विरोध में हुए प्रदर्शन में 6 फिलिस्तीनियों की जान चली गई थी।

यह दिन फिलिस्तीनी स्वतंत्रता संग्राम और जमीन के अधिकार के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

निष्कर्ष:

30 मार्च का दिन इतिहास, समाज और पर्यावरण के लिहाज से एक बहुआयामी महत्व रखता है। भारत में यह राजस्थान राज्य के गौरवशाली अतीत और स्वामी दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारक की स्मृति का दिन है। वहीं वैश्विक स्तर पर यह कचरा प्रबंधन की जरूरत और भूमि अधिकारों के संघर्ष की चेतना का प्रतीक बन चुका है।

इस दिन को हम एक अवसर के रूप में लें – न केवल इतिहास को जानने और याद करने के लिए, बल्कि पर्यावरण, सामाजिक समानता और स्वच्छता की दिशा में भी नए संकल्प लेने के लिए।


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