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Difference between Large cap,mid cap and small cap

Large cap और mid cap में मुख्य अंतर उनके मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) और कंपनी के आकार, जोखिम, तथा विकास क्षमता में होता है।

Large Cap:

ये वे कंपनियां होती हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹20,000 करोड़ या उससे अधिक होता है।

ये स्थापित, प्रसिद्ध और वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियां होती हैं।

इनके शेयरों में कम जोखिम होता है और ये कम अस्थिर होती हैं।

निवेश के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं।

ये कंपनियां अधिकतर स्थिर लाभांश देती हैं।

Mid Cap:

मिड कैप कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹5,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच होता है।

ये कंपनियां लार्ज कैप कंपनियों से छोटी होती हैं लेकिन स्मॉल कैप से बड़ी होती हैं।

ये कंपनियां अक्सर विकास के मध्य चरण में होती हैं और अधिक विकास की क्षमता रखती हैं।

इनका जोखिम लार्ज कैप से थोड़ा अधिक होता है लेकिन स्मॉल कैप कंपनी की तुलना में कम होता है।

ये कंपनियां भविष्य में लार्ज कैप बनने की संभावना रखती हैं।

Small Cap:

स्मॉल कैप कंपनियां वे होती हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (बाजार पूंजीकरण) ₹500 करोड़ या उससे कम होता है।

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन से मतलब है कंपनी के सभी बकाये शेयरों का कुल बाजार मूल्य, जो शेयर की कीमत और शेयर की संख्या के गुणा से निकाला जाता है।

ये कंपनियां आमतौर पर छोटी, नई या कम स्थापित होती हैं, जो विकास के शुरुआती चरण में होती हैं।
संक्षेप में

लार्ज कैप कंपनियां स्थिरता और कम जोखिम वाली होती हैं, जबकि मिड कैप कंपनियां मध्यम जोखिम और बेहतर विकास संभावनाओं के साथ आती हैं। मिड कैप कंपनियां निवेशकों को अधिक रिटर्न की संभावना देती हैं लेकिन उनके साथ थोड़ा अधिक जोखिम भी जुड़ा होता है।

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