ETF क्या है?
ETF एक मार्केटेबल फाइनेंशियल प्रोडक्ट है जो स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा और बेचा जाता है।
यह किसी कंपनी का सिंगल स्टॉक नहीं बल्कि विभिन्न सिक्योरिटीज का पोर्टफोलियो होता है, जिसमें इंडेक्स, कमोडिटी, बॉन्ड आदि शामिल हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, ETF निफ्टी 50 या BSE सेंसेक्स जैसे इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।
ETF को स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों की तरह खरीदा और बेचा जा सकता है।
ETF कैसे काम करता है?
ETF की कीमत स्टॉक मार्केट की भावनाओं और उसके अंतर्निहित संपत्ति (assets) के मूल्य पर निर्भर करती है।
निवेशक पूरे ट्रेडिंग दिन के दौरान बाजार मूल्य पर ETF के शेयर खरीद या बेच सकते हैं।
ETF के निर्माण और रिडेम्पशन (मूल्यांकन) की प्रक्रिया में "अधिकृत प्रतिभागी" (authorized participants) शामिल होते हैं, जो ETF यूनिट को underlying assets से जोड़ते हैं।
कुछ ETF इंडेक्स को passive तरीके से ट्रैक करते हैं, जबकि कुछ aktively management (जैसे पोर्टफोलियो मैनेजर द्वारा) होते हैं।
ETF के प्रकार
इंडेक्स ETF: ये ETF किसी विशिष्ट इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स को फॉलो करते हैं।
बॉन्ड ETF: ये सरकार या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश करते हैं और नियमित आय देते हैं।
कमीोडिटी ETF: जैसे गोल्ड ETF, जो सोने या अन्य कमोडिटी के प्रदर्शन को ट्रैक करते हैं।
सेक्टोरल ETF: खास सेक्टर जैसे ऑटो, बैंकिंग आदि को ट्रैक करते हैं।
ETF के फायदे
लिक्विडिटी: स्टॉक की तरह किसी भी समय बाजार में खरीदे या बेचे जा सकते हैं।
कम खर्च: म्यूचुअल फंड की तुलना में ETF में खर्च अनुपात कम होता है।
विविधीकरण: एक ETF में कई स्टॉक्स या अन्य संपत्ति होती हैं, जिससे जोखिम कम होता है।
पारदर्शिता: ETF का पोर्टफोलियो आमतौर पर सार्वजनिक होता है।
कम निवेश राशि: कम राशि से भी निवेश किया जा सकता है।
जोखिम और सावधानियां
मार्केट जोखिम के कारण ETF की कीमत में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
इंडेक्स ट्रैकिंग में छोटे अंतर (tracking error) हो सकते हैं।
रिसाव या अनियमितता की संभावना कुछ ETF में हो सकती है।
संक्षेप में, ETF एक सुविधाजनक और कम लागत वाला निवेश विकल्प है जो निवेशकों को स्टॉक एक्सचेंज में आसानी से विविधता वाली संपत्ति में निवेश करने का मौका देता है। यह म्यूचुअल फंड और स्टॉक का संयुक्त रूप माना जा सकता है जिसमें ट्रेडिंग की सुविधा होती है।
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