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Intraday Trading kya hai

इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?

इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब है एक ही ट्रेडिंग दिन के भीतर स्टॉक्स को खरीदना और बेचना। इसे डे ट्रेडिंग भी कहा जाता है। इस प्रकार का ट्रेडिंग उस दिन बाजार बंद होने से पहले सभी पोजीशनें बंद कर दी जाती हैं, जिससे कोई भी शेयर होल्डिंग रातभर के लिए नहीं रहतीं।

मुख्य बातें:
इस ट्रेडिंग में शेयरों का उद्देश्य निवेश के लिए नहीं, बल्कि उनके छोटे-छोटे मूल्य उतार-चढ़ाव से लाभ कमाना होता है।

जब कोई व्यक्ति एक ही दिन के भीतर स्टॉक खरीदता और बेचता है, तो उसे उस दिन के अंत तक अपनी पोजीशन बंद करनी होती है, नहीं तो ब्रोकर वह पोजीशन ऑटोमैटिकली बंद कर देता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है जिसमें इंट्राडे ऑप्शन उपलब्ध होता है।

लेवरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी आप अपने ब्रोकर से पैसे उधार लेकर ट्रेडिंग कर सकते हैं, जिससे ट्रेडिंग की क्षमता बढ़ जाती है पर जोखिम भी बढ़ता है।

इसका मुख्य उद्देश्य मार्केट में दिन के दौरान होने वाले प्राइस मूवमेंट का फायदा उठाकर तेज मुनाफा कमाना होता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि मार्केट के मूवमेंट तेजी से बदलते हैं और निर्णय त्वरित लेने होते हैं।

यह ट्रेडिंग तकनीकी विश्लेषण, बाजार के संकेतकों और चार्ट्स की मदद से की जाती है।

कई तरह की रणनीतियों जैसे मोमेंटम ट्रेडिंग, ब्रेकआउट ट्रेडिंग, स्कैल्पिंग आदि का उपयोग किया जाता है।

उदाहरण:
अगर कोई स्टॉक सुबह ₹500 पर है और दो घंटे में बढ़कर ₹550 हो जाए, और आपने 1000 स्टॉक्स खरीदे हों, तो इसे बेचकर ₹50,000 का लाभ कमाया जा सकता है।

लाभ और विशेषताएं:
त्वरित लाभ की संभावना: छोटे मूल्य उतार-चढ़ाव से जल्दी मुनाफा।

कोई रातभर का जोखिम नहीं: क्योंकि पोजीशन दिन के अंत तक बंद हो जाती हैं।

अधिक तरलता: कहीं भी जल्दी से एंट्री और एग्जिट संभव।

शुरुआत कैसे करें:
सबसे पहले एक ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट खोलें जो इंट्राडे ट्रेडिंग सपोर्ट करता हो।

बाजार की बुनियादी जानकारी और तकनीकी विश्लेषण सीखें।

छोटे पैमाने पर ट्रेडिंग करें ताकि नुकसान सीमित रहे।

स्पष्ट एंट्री और एग्जिट प्वाइंट निर्धारित करें।

बाजार को लगातार मॉनिटर करें और भावनाओं पर कंट्रोल रखें।

इंट्राडे ट्रेडिंग एक हाई रिस्क, हाई इनाम वाली रणनीति है, जिसमें अनुशासन और उचित जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले अच्छी तरह से सीखें और छोटी मात्रा से शुरू करें।

इंट्राडे ट्रेडिंग के फायदे (Benefits):

त्वरित लाभ: एक ही दिन में कीमतों के उतार-चढ़ाव से तुरंत लाभ कमाया जा सकता है।

ओवरनाइट जोखिम नहीं: सभी पोजीशन दिन के अंत तक बंद हो जाती हैं, इसलिए बाजार के अगले दिन के गैप या बड़े उतार-चढ़ाव से बचाव होता है।

लीवरेज (Leverage): ब्रोकर द्वारा लीवरेज या मार्जिन मिलता है, जिससे कम पूंजी में बड़ी ट्रेडिंग संभव होती है।

कम कमीशन शुल्क व डिलीवरी चार्ज नहीं: डिलीवरी ट्रांजैक्शन की तुलना में ब्रोकरेज कम हो सकता है।

अधिक लिक्विडिटी: हर दिन कई ट्रेडिंग अवसर और तुरंत पोजीशन एंट्री/एग्जिट संभव।

शॉर्ट-सेलिंग की संभावना: कीमत गिरेगी ऐसा लगने पर पहले बेचकर बाद में खरीद सकते हैं.
इंट्राडे ट्रेडिंग के नुकसान (Disadvantages):

उच्च जोखिम: तेजी से नुकसान भी हो सकता है, खासकर अगर बाजार प्रेडिक्शन गलत हो जाए।

मार्केट अस्थिरता: बाजार में अचानक बड़े उतार-चढ़ाव से बड़े नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।

ट्रांजैक्शन कॉस्ट: बार-बार ट्रेडिंग करने पर ब्रोकरज़ और टैक्स में कुल लागत बढ़ सकती है।

अनुभव और समय की जरूरत: पूरे दिन मार्केट पर नजर रखनी पड़ती है, फैसले तुरंत लेने होते हैं, जिससे मानसिक दबाव बनता है।

ज्यादातर नए ट्रेडर नुकसान में: रिसर्च के मुताबिक, 90-95% रिटेलर्स को इंट्राडे में नुकसान होता है, क्योंकि कट-लॉस और सही रणनीतियों की कमी होती है।

भावनात्मक निर्णय का खतरा: लोभ या डर में आकर खराब निर्णय लिए जा सकते हैं.

निष्कर्ष:

इंट्राडे ट्रेडिंग में लाभ की संभावना है, लेकिन जोखिम भी बहुत अधिक है। अनुभव, अनुशासन और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट के बिना इसमें सफल होना कठिन है। नई शुरुआत करने वालों को सीख-समझकर और सीमित पूंजी से शुरुआत करनी चाहिए।


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