संक्षेप में:
आप एक प्रीमियम (थोड़ा पैसा) देकर ऑप्शन खरीदते हैं।
इस ऑप्शन से आपको खरीदने या बेचने का अधिकार मिलता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि आप इसका इस्तेमाल करें।
अगर बाजार की कीमत आपकी उम्मीद के अनुसार बढ़ती या घटती है तो आप लाभ कमा सकते हैं।
अगर कीमत विपरीत होती है, तो आपका नुकसान केवल वह प्रीमियम होता है जो आपने दिया है।
ऑप्शन के दो प्रकार होते हैं:
कॉल ऑप्शन: आपको एक तय कीमत पर संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है।
पुट ऑप्शन: आपको एक तय कीमत पर संपत्ति बेचने का अधिकार देता है।
उदाहरण के लिए, यदि आपको लगता है कि निफ्टी का भाव 25,000 से ऊपर जाएगा तो आप कॉल ऑप्शन खरीद सकते हैं। आप एक प्रीमियम देंगे और यदि निफ्टी का भाव बढ़ता है, तो आप उस अधिकार से फायदा उठा सकते हैं। यदि भाव कम होता है, तो आपकी हानि सिर्फ प्रीमियम तक सीमित रहेगी।
यह एक प्रकार का फाइनेंशियल डेरिवेटिव है, जो निवेशक या ट्रेडर को कम निवेश में बाजार के रुझान पर दांव लगाने का मौका देता है। ऑप्शन बायिंग में आपका रिस्क सीमित रहता है, लेकिन लाभ की संभावना अनिश्चित और कभी-कभी बहुत अधिक होती है।
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