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Structure of Indian Stock Market

भारतीय शेयर बाजार की संरचना इस प्रकार है:

प्राथमिक बाजार (Primary Market)

यह वह बाज़ार है जहाँ कंपनियां पहली बार अपने शेयर जनता को जारी करती हैं।

इस प्रक्रिया को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) कहते हैं।

कंपनियां यहाँ से पूंजी जुटाती हैं।

माध्यमिक बाजार (Secondary Market)

यहाँ वे शेयर या प्रतिभूतियां खरीदी और बेची जाती हैं जो पहले से सूचीबद्ध हैं।

इसे स्टॉक एक्सचेंज भी कहा जाता है।

इसमें मुख्य रूप से दो प्रमुख एक्सचेंज हैं:

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)

नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority)

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) शेयर बाजार को नियंत्रित करता है।

SEBI का मुख्य काम पारदर्शिता, निवेशक संरक्षण, और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना है।

बिचौलिये और दलाल (Brokers and Intermediaries)

शेयर बाजार में निवेशक और कंपनियों के बीच दलाल (ब्रोकर्स) मध्यस्थ के रूप में काम करते हैं।

दलाल SEBI और स्टॉक एक्सचेंज से पंजीकृत होते हैं।

प्रमुख सूचकांक (Key Indices)

सेंसेक्स (Sensex): BSE में शीर्ष 30 कंपनियों का संग्रह।

निफ्टी 50 (Nifty 50): NSE में शीर्ष 50 कंपनियों का समूह।

डिपॉजिटरी (Depository)

शेयरों का इलेक्ट्रॉनिक रूप में संरक्षण होता है। भारत में दो मुख्य डिपॉजिटरी हैं:

NSDL (National Securities Depository Limited)

CDSL (Central Depository Services Limited)

बाजार के अन्य घटक

डेटा और सूचना प्रदाता

विनियमन एवं कानूनी ढांचा: सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1956 आदि।

विद्युत व्यापार प्रणाली: ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स जो पारदर्शी और कुशल ट्रेडिंग सुनिश्चित करते हैं।
संक्षेप में, 

भारतीय शेयर बाजार दो मुख्य हिस्सों में बँटा है — प्राइमरी मार्केट जहां नई शेयर बिक्री होती है, और सेकेंडरी मार्केट जहां शेयरों का व्यापार होता है। दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज (BSE और NSE) के तहत काम होता है, जो SEBI द्वारा नियंत्रित होता है। बाजार में दलाल, डिपॉजिटरी और सूचकांक जैसे महत्वपूर्ण घटक भी होते हैं, जो इसे सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाते हैं।

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