सितंबर में कौन-कौन सी सब्जियाँ लगाई जाती है
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| September me grow krne wali sabji |
भारत में सितंबर का महीना वर्षा ऋतु के अंतिम चरण और शरद ऋतु की शुरुआत का संकेत देता है। यह महीना खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होती है और तापमान भी धीरे-धीरे अनुकूल होने लगता है। इसलिए सितंबर में कई प्रकार की सब्जियाँ बोई जाती हैं जो सर्दियों में अच्छा उत्पादन देती हैं। आइए जानते हैं कि सितंबर में कौन-कौन सी सब्जियाँ लगाई जा सकती हैं:-
पालक (Spinach)
पालक एक अत्यंत लोकप्रिय हरी पत्तेदार सब्जी है। सितंबर का समय पालक की बुवाई के लिए आदर्श माना जाता है।
बुवाई का तरीका: पालक की सीधी बीजाई की जाती है।
बीज की मात्रा: लगभग 5-7 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
भूमि तैयारी: अच्छी तरह से जोती हुई, जैविक खाद से भरपूर भूमि।
सिंचाई: हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
कटाई: बुवाई के 30-40 दिन बाद पहली कटाई की जा सकती है।
मेथी (Fenugreek)
मेथी भी सितंबर में लगाई जाने वाली प्रमुख पत्तेदार फसलों में से एक है।
बुवाई का तरीका: सीधी बुवाई की जाती है।
बीज की मात्रा: 12-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
भूमि: हल्की दोमट मिट्टी उत्तम रहती है।
सिंचाई: आवश्यकता अनुसार, हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
कटाई: 25-30 दिन में मेथी तैयार हो जाती है।
मूली (Radish)
सितंबर में मूली की बुवाई बहुत अच्छे परिणाम देती है।
बुवाई का समय: सितंबर से नवंबर तक।
बीज की मात्रा: 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
प्रकार: जल्दी तैयार होने वाली किस्में जैसे पूसा चेतकी उपयुक्त हैं।
सिंचाई: सप्ताह में एक बार हल्की सिंचाई आवश्यक है।
कटाई: बुवाई के 40-50 दिन बाद।
गाजर (Carrot)
गाजर भी सितंबर में बुवाई के लिए उपयुक्त है, खासकर सर्दियों के लिए।
बुवाई का तरीका: सीधी बीजाई
बीज की मात्रा: 5-6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
भूमि: रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है।
सिंचाई: हर 7-10 दिन में हल्की सिंचाई।
कटाई: 70-90 दिन में गाजर तैयार हो जाती है।
मटर (Peas)
सितंबर के अंतिम सप्ताह से मटर की बुवाई शुरू की जा सकती है।
बीज की मात्रा: 60-80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
भूमि: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी होनी चाहिए।
सिंचाई: अंकुरण के बाद आवश्यकतानुसार।
कटाई: बुवाई के 60-80 दिन बाद।
पत्तागोभी और फूलगोभी (Cabbage & Cauliflower)
सितंबर में इन दोनों सब्जियों की नर्सरी लगाई जाती है, और बाद में मुख्य खेत में रोपाई की जाती है।
बीज की मात्रा: 250-300 ग्राम प्रति एकड़।
भूमि: अच्छे जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी।
सिंचाई: नर्सरी में हल्की सिंचाई, मुख्य खेत में रोपाई के बाद पर्याप्त पानी।
फसल अवधि: फूलगोभी 60-80 दिन में तैयार हो जाती है, पत्तागोभी 80-90 दिन में।
टमाटर (Tomato)
कुछ क्षेत्रों में सितंबर में टमाटर की दूसरी फसल के लिए नर्सरी बनाई जाती है।
बीज की मात्रा: 100-150 ग्राम प्रति एकड़।
भूमि: जैविक पदार्थों से भरपूर, अच्छी जल निकासी वाली भूमि।
सिंचाई: नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई।
रोपाई: 25-30 दिन पुरानी पौधों को खेत में रोपा जाता है।
कटाई: रोपाई के 60-75 दिन बाद।
शलजम (Turnip)
शलजम भी सितंबर में लगाने के लिए उत्तम विकल्प है।
बीज की मात्रा: 2-3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
भूमि: अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ भूमि।
सिंचाई: नियमित।
फसल अवधि: 45-60 दिन में शलजम तैयार हो जाते हैं।
सितंबर में खेती के लिए कुछ ज़रूरी सुझाव
मिट्टी की तैयारी: खेत को अच्छी तरह से जोत कर नरम और भुरभुरा बनाना चाहिए।
खाद प्रबंधन: जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का भरपूर उपयोग करें।
कीट और रोग नियंत्रण: समय-समय पर प्राकृतिक कीटनाशक या आवश्यकता अनुसार दवाइयों का छिड़काव करें।
सही बीज का चयन: स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार उन्नत किस्म के बीजों का चयन करें।
जल प्रबंधन: मौसम के अनुसार उचित समय पर सिंचाई करें ताकि पौधों को सही नमी मिलती रहे।

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