डिलीवरी ट्रेडिंग स्टॉक मार्केट में निवेश का एक ऐसा तरीका है जिसमें आप किसी शेयर को एक दिन से अधिक समय तक होल्ड करते हैं। इसके अंतर्गत आप शेयर खरीदते हैं और वे सीधे आपके डीमैट अकाउंट में आ जाते हैं, यानी इस ट्रेडिंग में शेयर का वास्तविक मालिकाना हक आपको मिलता है। यह तरीका लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए उपयुक्त होता है, जहां आप शेयर को कुछ दिनों, हफ्तों, महीनों या वर्षों तक रख सकते हैं ताकि इसके मूल्य में वृद्धि से लाभ प्राप्त हो सके।
डिलीवरी ट्रेडिंग में, आपको शेयर की पूरी कीमत का भुगतान करना होता है और कोई मार्जिन नहीं दिया जाता। आपके अकाउंट में पैसा या शेयर फ्रीज हो जाते हैं जब आप ट्रेड करते हैं। आपके शेयर डीमैट अकाउंट में सेटलमेंट के बाद पहुंचते हैं, जो आमतौर पर दो कार्यदिवस के भीतर होता है।
डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे:
आप शेयर के आधिकारिक मालिक बन जाते हैं और डिविडेंड, बोनस, राइट्स इश्यू जैसे कॉर्पोरेट लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
लंबी अवधि तक शेयर को रखकर निवेश के अच्छे रिटर्न पाने का मौका मिलता है।
शेयर बाजार की अस्थिरता के बावजूद धैर्य बनाए रखने पर फायदा हो सकता है।
आपके शेयर आधार पर बैंक या वित्तीय संस्थान से कर्ज लेने की सुविधा भी मिल सकती है।
डिलीवरी ट्रेडिंग में जोखिम कम होता है और यह उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना चाहते हैं। यह इंट्राडे ट्रेडिंग के विपरीत है, जहां शेयर एक ही दिन में खरीदे और बेचे जाते हैं।
डिलीवरी ट्रेडिंग करते समय ध्यान देने वाली बातें:
शेयर खरीदने से पहले अच्छी तरह रिसर्च करें।
पैसे को एक ही शेयर में न लगाकर diversified portfolio बनाएं।
निवेश के लिए उन कंपनियों को चुनें जो मजबूत वित्तीय स्थिति और अच्छा इतिहास रखती हों।
संक्षेप में, डिलीवरी ट्रेडिंग स्टॉक खरीदने और उसे अपने डीमैट अकाउंट में रखकर लंबी अवधि में लाभ कमाने का तरीका है, जिसमें आप शेयर का वास्तविक स्वामित्व प्राप्त करते हैं और कंपनी के दीर्घकालिक फायदे उठा सकते हैं। यह एग्रेसिव ट्रेडिंग की तुलना में अधिक स्थिर और सुरक्षित तरीका माना जाता है।
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