NSDL (National Securities Depository Limited) और CDSL (Central Depository Services Limited) दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के लिए डिपॉजिटरी हैं, लेकिन इनमें कुछ प्रमुख अंतर हैं:
विशेषता [NSDL]--
स्थापना वर्ष- 1996
मुख्य जुड़ाव- NSE (National Stock Exchange)
डिपॉजिटरी अकाउंट नंबर - 14-अंकों का नंबर, 'IN' से शुरू
किसके लिए उपयुक्त - संस्थागत और HNI निवेशक
बाज़ार हिस्सेदारी- पहली और बड़ी डिपॉजिटरी
संचालित करने वाली संस्थाएं- NSE, IDBI, SBI, UTI, HDFC Bank
नियामक- SEBI
विशेषता [CDSL]--
स्थापना वर्ष- 1999
मुख्य जुड़ाव-BSE (Bombay Stock Exchange)
डिपॉजिटरी अकाउंट नंबर -16-अंकों का नंबर
किसके लिए उपयुक्त -रिटेल निवेशक, छोटे शहरों के निवेशक
बाज़ार हिस्सेदारी- भारत में सबसे ज्यादा डिमैट खाते
संचालित करने वाली संस्थाएं-BSE, HDFC Bank, Bank of India, SBI, Bank of Baroda आदि
नियामक- SEBI
महत्वपूर्ण बिंदु:
NSDL मुख्य रूप से NSE के साथ जुड़ा है, जबकि CDSL BSE के साथ।
NSDL पुराना है और बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए ज्यादा पसंद किया जाता है, वहीं CDSL में रेगुलर रिटेल निवेशक ज्यादा हैं।
NSDL का डेमैट अकाउंट नंबर 14 अंक का होता है (IN से शुरू होता है), जबकि CDSL का 16 अंक का होता है।
दोनों डिपॉजिटरी निवेशकों को डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DPs) के माध्यम से सेवाएं देती हैं।
दोनों SEBI के अंतर्गत आते हैं और इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में शेयर सुरक्षित रखते हैं.
निष्कर्ष:
NSDL और CDSL दोनों ही निवेशकों को डिमैट खाते की सुविधा देते हैं। आपके खाते की डिपॉजिटरी आपके ब्रोकिंग पार्टनर (अथवा DP) से तय होती है — दोनों सेवाएं लगभग समान हैं, बस उनका जुड़ाव और कुछ प्रक्रियागत अंतर हैं।
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