इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब है किसी कंपनी के शेयर या अन्य सिक्योरिटी (जैसे बॉन्ड) की खरीद-बिक्री ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसके पास कंपनी के बारे में कोई महत्वपूर्ण, गैर-सार्वजनिक (गोपनीय) जानकारी होती है। इस जानकारी का आम निवेशकों को पता नहीं होता, लेकिन इनसाइडर अपने फायदे के लिए इसका इस्तेमाल करता है—जैसे प्रोडक्ट लॉन्च, विलय, वित्तीय नतीजे, अधिग्रहण या कोई बड़ी खबर, जिससे शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव आ सकता है.
इसे अवैध और अनुचित क्यों माना जाता है?
अवैध इनसाइडर ट्रेडिंग वह होती है जब अंदरूनी जानकारी के आधार पर शेयर की खरीद-बिक्री की जाती है और इसका बाहर सामान्य निवेशकों को कोई पता नहीं है। इससे इनसाइडर को अनुचित फायदा मिलता है और आम लोगों का विश्वास बाजार की निष्पक्षता में कम होता है.
कानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग तब होती है, जब कंपनी के अधिकारी या कर्मचारी अपने ट्रेड्स की रिपोर्ट सही तरीके से करते हैं और कोई गैर-सार्वजनिक महत्वपूर्ण जानकारी इसकी वजह नहीं होती। ऐसी ट्रेडिंग लीगल है, बशर्ते पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार हो
इनसाइडर ट्रेडिंग कैसे होती है?
गोपनीय जानकारी की प्राप्ति
व्यक्ति को कंपनी की कोई जरूरी, गैर-पब्लिक जानकारी मिलती है—जैसे नया सौदा, विलय, नुकसान या प्रॉफिट, अधिग्रहण इत्यादि.
प्रैक्टिकल डिसीजन
व्यक्ति तय करता है कि इस जानकारी के आधार पर उसे शेयर खरीदना या बेचना चाहिए, जिससे उसे सीधा फायदा मिले.
ट्रेडिंग एग्जीक्यूशन
व्यक्ति खुद या अपने जानने वालों के नाम से शेयर ट्रेड करता है—कई बार रिश्तेदार, दोस्त या ऑफशोर अकाउंट का इस्तेमाल करके.
लाभ लेना
जब सूचना सार्वजनिक हो जाती है और शेयर की कीमत बदल जाती है, इनसाइडर अपने शेयर अच्छे दाम पर बेचता है या जल्दी खरीदता है। इससे उसे फायदा मिलता है और आम निवेशकों को नुकसान
खास बातें और उदाहरण
इनसाइडर ट्रेडिंग की सबसे बड़ी विशेषता है—अनुचित लाभ पाने के लिए गोपनीय, महत्वपूर्ण जानकारी का उपयोग.
यदि कोई उच्च पदाधिकारी कंपनी के शेयर इस जानकारी के आधार पर खरीदता है और बाद में खबर बाहर आते ही उन्हें बेच देता है, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग का क्लासिक उदाहरण है.
इनसाइडर ट्रेडिंग के अपराध में पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी को कानूनी सजा, जुर्माना या जेल भी हो सकती है। भारत में SEBI जैसे रेगुलेटर इन मामलों की जांच और सजा तय करते हैं.
निष्कर्ष
इनसाइडर ट्रेडिंग को दुनिया की अधिकांश शेयर बाजारों में एक बड़ा आर्थिक अपराध माना जाता है, क्योंकि यह बाजार की निष्पक्षता व पारदर्शिता को प्रभावित करता है और आम निवेशक के हित के खिलाफ है। सभी ट्रेडिंग की गोपनीय जानकारी अगर किसी निजी लाभ के लिए इस्तेमाल होती है, तो वह अवैध होती है। अगर पारदर्शिता और सही प्रकटीकरण के तहत ट्रेडिंग होती है, तो वह वैध मानी जा सकती है.
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