1. स्थापना और इतिहास
BSE: एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है, जिसकी स्थापना 1875 में हुई थी।
NSE: भारत का पहला पूरी तरह स्वचालित और इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज है, जिसकी स्थापना 1992 में हुई थी
2. प्रमुख सूचकांक (Benchmark Index)
BSE: सेंसेक्स (Sensex) — यह 30 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।
NSE: निफ्टी 50 (Nifty 50) — यह 50 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को मापता है।
3. लिस्टेड कंपनियाँ की संख्या
BSE: लगभग 5,500 कंपनियाँ सूचीबद्ध हैं, जिसमें छोटे और मिड-कैप कंपनियाँ भी शामिल हैं।
NSE: लगभग 1,600 कंपनियाँ सूचीबद्ध हैं, अधिकतर लार्ज-कैप एवं उच्च तरलता वाली कंपनियाँ।
4. प्रौद्योगिकी और ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म
BSE: 1995 से ‘BOLT’ (BSE On-Line Trading) इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करता है।
NSE: पूरी तरह से ऑटोमेटेड “NEAT” (National Exchange for Automated Trading) सिस्टम का उपयोग शुरू से करता है
5. ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी
BSE: अपेक्षाकृत कम तरलता और ट्रेडिंग वॉल्यूम।
NSE: उच्चतर ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी, डेरिवेटिव्स मार्केट में वर्चस्व।
6. मूल्य निर्धारण और डिस्कवरी
दोनों में शेयरों की कीमतें बाजार की मांग और आपूर्ति के अनुसार तय होती हैं। ऑर्डर बुक में खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर मिलाए जाते हैं।
7. क्लियरिंग एवं सेटलमेंट
दोनों में ट्रेडिंग के बाद लेनदेन की क्लियरिंग व सेटलमेंट होता है। NSE में NSCCL, BSE में ICCL सेटलमेंट प्रक्रिया देखता है। ट्रांजैक्शन आमतौर पर T+2 डेज (यानी ट्रेडिंग के दो दिन बाद) क्लियर होते हैं
8. मार्केट सेगमेंट्स
दोनों एक्सचेंज में इक्विटी, डेरिवेटिव्स, म्यूचुअल फंड्स, बॉन्ड्स आदि का ट्रेड होता है।
NSE: डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में अग्रणी।
BSE: इक्विटी सेगमेंट में विविधता; छोटे-मध्यम आकार की कंपनियाँ अधिक हैं।
9. ट्रेडिंग अवर्स
प्री-ओपन सत्र: सुबह 9:00 से 9:15
नियमित ट्रेडिंग: सुबह 9:15 से शाम 3:30
पोस्ट-क्लोज़िंग सत्र: 3:30 के बाद।
10. ट्रेडर्स/निवेशकों के लिए उपयोगिता
BSE: शुरुआती निवेशकों तथा विविध पोर्टफोलियो चाहने वालों के लिए उपयुक्त।
NSE: अनुभवी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग में विशेष रुचि रखने वाले टे्रडर्स के लिए उपयुक्त।
11. नियमन
दोनों एक्सचेंज SEBI (Securities and Exchange Board of India) द्वारा नियंत्रित और विनियमित हैं।
संक्षेप में:
NSE आधुनिक तकनीक, उच्च तरलता और तेज ट्रेडिंग के लिए प्रसिद्ध है, जबकि BSE पुराना, ऐतिहासिक और अधिक कंपनियों के सुविधाजनक लिस्टिंग विकल्प के लिए जाना जाता है। अधिकांश ब्लू-चिप शेयर दोनों पर लिस्टेड हैं और दोनों पर एक ही दाम पर खरीदे जा सकते हैं, लेकिन डेरिवेटिव ट्रेडिंग के दृष्टिकोण से NSE लोकप्रिय है, जबकि BSE विविध कंपनियों के लिए उपयोगी है।
0 Comments