मुख्य बातें:
सब-ब्रोकर मुख्य ब्रोकर और निवेशक के बीच लिंक की तरह काम करता है।
यह क्लाइंट को स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने में मदद करता है, लेकिन खुद एक्सचेंज का सदस्य नहीं होता।
सब-ब्रोकर को मुख्य ब्रोकर द्वारा अधिकृत किया जाता है और वे ब्रोकर की ओर से काम करते हैं।
वे क्लाइंट को निवेश सलाह, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, रिसर्च आदि सेवाएं दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए SEBI से पंजीकरण अनिवार्य होता है।
सब-ब्रोकर को उनके द्वारा लाए गए निवेशकों के ट्रेड पर कमीशन मिलता है।
वे नियामक अनुपालन और दस्तावेज़ीकरण में भी क्लाइंट की मदद करते हैं।
सरल शब्दों में, सब-ब्रोकर वह एजेंट होता है जो मुख्य स्टॉक ब्रोकर का प्रतिनिधि बनकर ग्राहक को निवेश और व्यापार के लिए सेवाएं देता है, लेकिन वह खुद सीधे एक्सचेंज में ट्रेड नहीं कर सकता।
यह व्यवसाय मुख्य ब्रोकर की पहुंच को बढ़ाने में मदद करता है और व्यक्तिगत निवेशकों को स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराता है। सब-ब्रोकर बनने के लिए SEBI के नियमों के अनुसार पंजीकरण और प्रमाणपत्र जैसे NISM की आवश्यकता होती है।
इस तरह सब-ब्रोकर स्टॉक मार्केट के अंदर निवेशकों और ब्रोकर के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
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