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Mid cap kya hai

मिड कैप (Mid Cap) का मतलब है मिडियम कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियां। ये ऐसी कंपनियां होती हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) मध्यम आकार का होता है, यानी उनका शेयर बाजार में कुल मूल्य लार्ज कैप (बड़ी कंपनियों) और स्मॉल कैप (छोटी कंपनियों) के बीच होता है।

विशेष रूप से, सेबी (SEBI) के अनुसार, मिड कैप कंपनियों का बाजार पूंजीकरण लगभग 5,000 करोड़ रुपये से 20,000 करोड़ रुपये के बीच होता है। मिड कैप म्यूचुअल फंड ऐसे फंड होते हैं जो अपनी होल्डिंग का बड़ा हिस्सा इन मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं।

मिड कैप कंपनियां वृद्धि के चरण में होती हैं, इसलिए इनके शेयरों में अच्छी वृद्धि की संभावना होती है, लेकिन इनके साथ बाजार की अस्थिरता और जोखिम भी थोड़ा ज्यादा होता है लार्ज कैप की तुलना में। मिड कैप फंड निवेशकों को उच्च रिटर्न का अवसर देते हैं लेकिन जोखिम भी अधिक होता है।
संक्षेप में:

मिड कैप कंपनियां आकार में मध्यम होती हैं।

इनका मार्केट कैप ₹5,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच होता है।

मिड कैप फंड इन कंपनियों में निवेश करते हैं।

संभावित लाभ अधिक होते हैं लेकिन जोखिम भी मध्यम से उच्च होता है।

ये लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्त होते हैं।

इसका उद्देश्य निवेशकों को विकास की संभावनाओं के साथ मध्यम स्तर का जोखिम देने का होता है।

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