चूंकि आप सूर्य और चंद्र भेदन के बारे में जान रहे हैं, तो इनका आपके दोषों पर सीधा प्रभाव पड़ता है:
1. वात (Vata) - वायु और आकाश
वात दोष के असंतुलित होने पर शरीर में सूखापन, जोड़ों में दर्द, चिंता और गैस जैसी समस्या होती है।
प्राणायाम: वात को शांत करने के लिए भ्रामरी और अनुलोम-विलोम सबसे अच्छे हैं।
सूर्य/चंद्र भेदन का प्रभाव: बहुत अधिक सूर्य भेदन वात को बढ़ा सकता है (शरीर को सुखा सकता है), इसलिए वात प्रधान व्यक्ति को मध्यम गति से प्राणायाम करना चाहिए।
2. पित्त (Pitta) - अग्नि और जल
पित्त दोष बढ़ने पर शरीर में गर्मी, एसिडिटी, गुस्सा और त्वचा की समस्याएं होती हैं।
प्राणायाम: चंद्र भेदन पित्त के लिए रामबाण है क्योंकि यह शरीर को ठंडा करता है। इसके अलावा शीतली और शीतकारी प्राणायाम भी पित्त को शांत करने के लिए बेहतरीन हैं।
सावधानी: पित्त प्रकृति वालों को सूर्य भेदन बहुत कम या सर्दियों में ही करना चाहिए, क्योंकि यह अग्नि को और बढ़ा देता है।
3. कफ (Kapha) - पृथ्वी और जल
कफ दोष बढ़ने पर सुस्ती, वजन बढ़ना, फेफड़ों में जमाव और सर्दी-खांसी की समस्या होती है।
प्राणायाम: सूर्य भेदन कफ के लिए सबसे अच्छा है क्योंकि यह शरीर में गर्मी और गति पैदा करता है। इसके साथ ही कपालभाति और भस्त्रिका कफ को खत्म करने में मदद करते हैं।
सावधानी: कफ प्रधान व्यक्ति को चंद्र भेदन कम करना चाहिए, खासकर सर्दी के मौसम में, क्योंकि यह ठंडक बढ़ाता है।
संतुलन के लिए त्वरित मार्गदर्शिका (Quick Table)
दोष:- वात. , लक्षण:- बेचैनी,कब्ज,दर्द , सबसे अच्छा प्राणायाम:- नाड़ी शोधन, (Anulom-vilom),भ्रामरी
दोष:- पित्त. , लक्षण:-गर्मी, गुस्सा,जलन, सबसे अच्छा प्राणायाम:-चंद्र भेदन, शीतली
दोष:- कफ. ,लक्षण:-सुस्ती,मोटापा,बलगम, सबसे अच्छा प्राणायाम:-सूर्य भेदन,कपाल भाती,भस्त्रिका
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