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What is Ajna chakra full details

 आज्ञा चक्र (Ajna Chakra) को हिंदी में "आज्ञा चक्र" या "तीसरी आंख का चक्र" कहा जाता है। यह हमारे शरीर के सात प्रमुख चक्रों (ऊर्जा केंद्रों) में से छठा चक्र होता है। इसका संबंध अंतर्ज्ञान, मानसिक स्पष्टता, और आत्मज्ञान से होता है।

Ajna Chakra
About Ajna Chakra 

🔮 आज्ञा चक्र की संपूर्ण जानकारी (Full Details in Hindi):


1. नाम और स्थान:

संस्कृत नाम: आज्ञा (Ajna) का अर्थ है "आदेश" या "आज्ञा"

स्थान: यह चक्र दो भौंहों के बीच, माथे के केंद्र में स्थित होता है, जिसे "तीसरी आंख" कहा जाता है।


2. रंग (Color):

गहरा नीला या जामुनी (इंडीगो)


3. तत्त्व (Element):

इस चक्र का कोई भौतिक तत्त्व नहीं होता, यह मन और चेतना से जुड़ा होता है।


4. बीज मंत्र (Beej Mantra):

"ॐ" (Om या Aum) — यह ब्रह्मांड का मूल ध्वनि (साउंड) माना जाता है।


5. गुण और विशेषताएँ:

अंतर्ज्ञान (Intuition)

स्पष्ट दृष्टि (Clarity of thought)

कल्पना शक्ति (Imagination)

मानसिक शक्ति (Mental strength)

ध्यान और आत्मज्ञान की क्षमता


6. आज्ञा चक्र से जुड़ी ग्रंथि (Gland):

पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) — यह नींद, जागरूकता और आंतरिक समय चक्र (biological clock) को नियंत्रित करती है।


7. संतुलन की स्थिति (Balanced Ajna Chakra):

जब यह चक्र संतुलित होता है, तब व्यक्ति में:

गहरी अंतर्दृष्टि होती है

निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है

मानसिक शांति और स्पष्टता बनी रहती है

आत्म-ज्ञान की ओर प्रगति होती है


8. असंतुलन के लक्षण (Blocked or Imbalanced Ajna Chakra):

भ्रमित रहना

निर्णय न ले पाना

सिरदर्द, माइग्रेन

अवसाद या चिंता

कल्पना शक्ति में कमी


9. संतुलन हेतु उपाय (How to Balance Ajna Chakra):

🧘 ध्यान (Meditation):

"ॐ" का जाप करें

तीसरी आंख पर ध्यान केंद्रित करें

🌿 योगासन:

बालासन (Child’s Pose)

ध्यान मुद्रा में बैठना

💎 क्रिस्टल थेरेपी:

लैपिस लैज़ुली (Lapis Lazuli)

एमेथिस्ट (Amethyst)

🎵 ध्वनि चिकित्सा:

"ॐ" या 852 Hz जैसी फ्रीक्वेंसी सुनना

🔵 रंग चिकित्सा:

गहरे नीले रंग का उपयोग


10. आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance):

यह चक्र व्यक्ति को आत्मा और ब्रह्मांड के साथ जोड़ने की दिशा में पहला बड़ा कदम है।

इसे "ज्ञान नेत्र" या "दिव्य दृष्टि" भी कहा जाता है।



🌟 आज्ञा चक्र सक्रिय करने की साधना (Ajna Chakra Meditation)


🕉️ समय और स्थान:

सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को शांत समय में करें।

शांत, स्वच्छ, और हवादार जगह चुनें।

योगासन (जैसे सुखासन या पद्मासन) में बैठें, रीढ़ सीधी हो।


🧘‍♂️ चरणबद्ध साधना विधि:

1. श्वास पर नियंत्रण (Breathing):

आंखें बंद करें।

गहरी सांस लें (नाक से) – 4 सेकंड तक

सांस रोकें – 4 सेकंड

धीरे-धीरे छोड़ें – 6 सेकंड तक

यह प्रक्रिया 3 बार करें


2. ध्यान केंद्रित करना (Focus Point):

ध्यान को माथे के बीचों बीच (दोनों भौंहों के बीच) लाएं।

अपनी कल्पना में वहां एक नीले-जैसे प्रकाश को चमकते हुए देखें।

वह प्रकाश आपके पूरे मस्तिष्क को भर रहा है, ऐसा अनुभव करें।


3. बीज मंत्र जप (Mantra Chanting):

अब 7 बार या 21 बार ॐ (Aum) मंत्र का उच्चारण करें।

मंत्र उच्चारण विधि:

ॐ = आ–ऊ–म (तीनों ध्वनियों को धीरे-धीरे खींचें)


जैसे: आआआऊऊऊम्म्म्म्म्… (गूंज की अनुभूति होनी चाहिए)


4. मौन ध्यान (Silent Meditation):

अब कुछ मिनट तक चुपचाप ध्यान करें।

तीसरी आंख पर ध्यान केंद्रित रखें।

यदि विचार आएं, उन्हें बिना प्रतिक्रिया के जाने दें।


5. समापन (Closing):

तीन बार गहरी सांस लें और छोड़ें।

धीरे-धीरे आंखें खोलें।

मन में शांति, दृढ़ता और आंतरिक शक्ति का अनुभव करें।


अभ्यास की अवधि:

प्रतिदिन कम से कम 10 से 15 मिनट

एक सप्ताह के भीतर मानसिक स्पष्टता बढ़ने लगती है।

21 दिन तक निरंतर अभ्यास से जागरूकता और अंतर्ज्ञान तेज़ होता है।


✅ अतिरिक्त सुझाव:

भोजन हल्का और सात्विक रखें।

नीला रंग पहनना या देखना भी लाभकारी हो सकता है।

मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें — यह चक्र "गहरी एकाग्रता" से ही विकसित होता है।

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