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What is insider trading

इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) एक ऐसा शब्द है जो अक्सर शेयर बाजार, वित्तीय दुनिया और कॉर्पोरेट मामलों में सुनने को मिलता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी कंपनी से जुड़ा व्यक्ति (जैसे निदेशक, कर्मचारी, प्रमोटर आदि) कंपनी की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर शेयर बाजार में लाभ कमाने की कोशिश करता है। भारत सहित दुनियाभर में यह एक अपराध माना जाता है क्योंकि इससे सामान्य निवेशकों के साथ अन्याय होता है।

What is Insider trading
About Insider trading

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इनसाइडर ट्रेडिंग क्या है, इसके प्रकार, इसके प्रभाव, भारत में इसके कानून, और इससे कैसे बचा जा सकता है।


इनसाइडर ट्रेडिंग की परिभाषा


इनसाइडर ट्रेडिंग का अर्थ होता है — किसी सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी की ऐसी गोपनीय जानकारी (जिसे 'प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन' कहा जाता है) का उपयोग कर उस कंपनी के शेयरों की खरीद-फरोख्त करना, जो जानकारी आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है।


उदाहरण: मान लीजिए कि एक कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी यह जानता है कि कंपनी को एक बड़ा सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलने वाला है, जिससे कंपनी का शेयर भाव काफी बढ़ेगा। यदि वह इस जानकारी के आधार पर शेयर पहले से खरीद लेता है और बाद में मुनाफा कमाता है, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग कहलाएगा।



इनसाइडर कौन होता है


इनसाइडर वह व्यक्ति होता है जिसके पास कंपनी से जुड़ी गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारी होती है। ये लोग निम्नलिखित हो सकते हैं:


1. कंपनी के निदेशक (Directors)



2. वरिष्ठ प्रबंधन (Senior Management)



3. कर्मचारी (Employees)



4. ऑडिटर, कंसल्टेंट या कानूनी सलाहकार



5. कंपनी के प्रमोटर



6. वह कोई भी व्यक्ति जिसे ये गोपनीय जानकारी किसी रूप में मिली हो



प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन क्या है


प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन (Price Sensitive Information) वह जानकारी होती है जो यदि सार्वजनिक हो जाए तो कंपनी के शेयर मूल्य पर सीधा असर डाल सकती है। इसके कुछ उदाहरण:


कंपनी की तिमाही या वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट


विलय या अधिग्रहण की योजनाएं


डिविडेंड की घोषणा


किसी बड़े कॉन्ट्रैक्ट का मिलना या खोना


कानूनी मामलों का निपटारा


किसी प्रमुख अधिकारी का इस्तीफा



इनसाइडर ट्रेडिंग के प्रकार


1. कानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग (Legal Insider Trading):

यदि कोई इनसाइडर सभी नियमों का पालन करते हुए और समय पर खुलासा करते हुए कंपनी के शेयरों का लेनदेन करता है, तो इसे वैध इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता है।



2. गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग (Illegal Insider Trading):

जब कोई इनसाइडर गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करके निजी लाभ के लिए लेन-देन करता है, बिना जानकारी को सार्वजनिक किए, तो यह अवैध होता है।


भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून


भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग पर नियंत्रण रखने के लिए सेबी (SEBI -Securities and Exchange Board of India) द्वारा बनाए गए नियमों का पालन किया जाता है।


SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015:


यह नियम इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए बनाया गया है।


इसके अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि कौन इनसाइडर है और कौन सी जानकारी प्राइस सेंसिटिव मानी जाएगी।


सभी कंपनियों को अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों की जानकारी देना अनिवार्य है।


यदि कोई इनसाइडर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर जुर्माना, जेल की सजा या दोनों हो सकती हैं।



इनसाइडर ट्रेडिंग के दुष्प्रभाव


1. निष्पक्षता का अभाव: इनसाइडर ट्रेडिंग से आम निवेशकों के साथ अन्याय होता है क्योंकि वे जरूरी जानकारी के बिना निवेश करते हैं।



2. बाजार में विश्वास की कमी: जब निवेशक यह समझते हैं कि बाजार में कुछ लोग विशेष जानकारी का लाभ उठा रहे हैं, तो वे शेयर बाजार से दूरी बनाने लगते हैं।



3. निवेश में गिरावट: विदेशी और घरेलू निवेशक ऐसे बाजार में निवेश करने से कतराते हैं, जहां इनसाइडर ट्रेडिंग जैसी गतिविधियां हो रही हों।



4. कंपनी की साख को नुकसान: किसी कंपनी के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला बनना उसकी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक होता है।



प्रमुख उदाहरण (भारत में)


1. Infosys केस (2020):


SEBI ने इंफोसिस के कुछ कर्मचारियों और उनके करीबी लोगों पर इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप लगाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने कंपनी की तिमाही रिपोर्ट लीक होने से पहले शेयरों में लेनदेन किया।


2. Reliance Industries मामला (2007):


SEBI ने रिलायंस और उसके कुछ निदेशकों पर इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। हालांकि मामला वर्षों तक चला और बाद में सेटलमेंट हुआ।



इनसाइडर ट्रेडिंग से बचाव कैसे करें


1. कंपनी की आंतरिक नीतियां: सभी कंपनियों को एक "कोड ऑफ कंडक्ट" बनाना चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग न हो।



2. ट्रेडिंग विंडो: कंपनियां एक निश्चित अवधि तय करती हैं जिसमें कर्मचारियों को ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होती, विशेष रूप से जब कोई बड़ी घोषणा होने वाली हो।



3. खुलासा (Disclosure): अगर कोई अधिकारी या इनसाइडर शेयरों में ट्रेड करता है, तो उसका खुलासा SEBI और स्टॉक एक्सचेंज को करना होता है।



4. SEBI की निगरानी: सेबी लगातार बाजार गतिविधियों की निगरानी करता है और संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल जांच करता है।


इनसाइडर ट्रेडिंग में सजा और दंड


SEBI के अनुसार, इनसाइडर ट्रेडिंग के दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित दंड दिए जा सकते हैं:


1. अधिकतम ₹25 करोड़ या लेन-देन के तीन गुना तक जुर्माना।



2. अधिकतम 10 साल की कैद।



3. कोर्ट के आदेश से निवेश करने पर रोक या अन्य प्रतिबंध।



निष्कर्ष


इनसाइडर ट्रेडिंग एक गंभीर वित्तीय अपराध है जो केवल एक व्यक्ति या कंपनी ही नहीं, बल्कि पूरे शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसलिए SEBI जैसे नियामक संस्थाओं की सख्त निगरानी और नियमों की पालना बेहद जरूरी है। हर निवेशक को भी सतर्क रहना चाहिए और केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही निवेश के निर्णय लेने चाहिए।


न्याय, पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना चाहिए 



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