कमोडिटी मार्केट वह बाजार है जहां कच्चे माल या प्राथमिक उत्पादों का व्यापार होता है। इसमें कृषि उत्पाद, धातु, ऊर्जा संसाधन आदि शामिल होते हैं। यह बाजार भौतिक (स्पॉट) और वायदा (फ्यूचर्स) दोनों प्रकार के हो सकते हैं।
मुख्य बातें:
कमोडिटी मार्केट में वस्तुएं वे होती हैं जिनका प्राकृतिक उत्पादन होता है या जो कच्चे माल हैं, जैसे सोना, तेल, अनाज, कॉफी, धातुएं आदि।
इसमें व्यापारी, उत्पादक और उपभोक्ता शामिल होते हैं। उत्पादक अपने माल को लाभकारी कीमत पर बेचना चाहते हैं, उपभोक्ता आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहते हैं, और सट्टेबाज कीमतों में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाना चाहते हैं।
कमोडिटी बाजार को आमतौर पर दो प्रकारों में बांटा जाता है:
भौतिक बाजार (स्पॉट मार्केट) जहाँ वस्तु की तत्काल डिलीवरी होती है।
फ्यूचर्स बाजार जहाँ भविष्य में किसी निर्धारित तिथि पर एक पूर्व-निर्धारित कीमत पर खरीद-बिक्री के कॉन्ट्रैक्ट्स होते हैं।
कीमतें मांग और आपूर्ति की स्थिति के आधार पर तय होती हैं।
इस बाजार में निवेशक वायदा अनुबंधों के माध्यम से भविष्य की कीमतों पर सट्टा लगा सकते हैं और जोखिम प्रबंधन कर सकते हैं।
कमोडिटी मार्केट का महत्व:
यह आर्थिक विकास के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति और मांग को नियंत्रित करता है।
किसानों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाव में मदद करता है।
निवेशकों को विविधता और अतिरिक्त निवेश के अवसर प्रदान करता है।
इस प्रकार, कमोडिटी मार्केट कच्चे माल की खरीद-बिक्री और व्यापार की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है।

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