ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग विशेषज्ञ) क्या है
ऑर्थोपेडिक चिकित्सा एक ऐसी शाखा है जो मानव शरीर की हड्डियों, जोड़ो, स्नायुबंधन (ligaments), मांसपेशियों, नसों और टेंडन्स से संबंधित बीमारियों, चोटों और विकारों के निदान, इलाज और रोकथाम से संबंधित होती है। इस क्षेत्र के डॉक्टरों को ऑर्थोपेडिक सर्जन या हड्डी रोग विशेषज्ञ कहा जाता है। यह चिकित्सा विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि हमारा पूरा शरीर हड्डियों और जोड़ों की सहायता से चलता है।
ऑर्थोपेडिक की विशेषताएँ:
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ विभिन्न प्रकार की समस्याओं का इलाज करते हैं जैसे:
हड्डियों का टूटना (Fracture)
गठिया (Arthritis)
स्लिप डिस्क (Slip Disc)
जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement)
मांसपेशियों की खिंचाव या चोट
रीढ़ की हड्डी की समस्याएं
जन्मजात असामान्यताएँ (Congenital Disorders)
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)
ऑर्थोपेडिक सर्जन क्या करते हैं
ऑर्थोपेडिक सर्जन का कार्य केवल ऑपरेशन करना नहीं होता, बल्कि वे रोगी का सम्पूर्ण मूल्यांकन करके उचित इलाज सुझाते हैं। उनका कार्यक्षेत्र निम्नलिखित हो सकता है:
नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट:
दवाओं द्वारा इलाज
भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी)
कास्ट (plaster) या स्प्लिंट का उपयोग
इंजेक्शन थैरेपी
सर्जिकल ट्रीटमेंट:
जोड़ प्रत्यारोपण (जैसे घुटने या कूल्हे का ऑपरेशन)
रीढ़ की हड्डी की सर्जरी
टूटी हुई हड्डी को जोड़ना
आर्थ्रोस्कोपी (Arthroscopy) – एक प्रकार की मिनिमल इनवेसिव सर्जरी
हड्डी रोग के सामान्य कारण:
ऑर्थोपेडिक समस्याएँ कई कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं:
आघात (Injury): दुर्घटनाएं, गिरना या अचानक झटका लगना
उम्र बढ़ना: बुज़ुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया अधिक देखने को मिलते हैं
व्यायाम की कमी: जिससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं
गलत जीवनशैली: जैसे बैठने का गलत तरीका, वजन अधिक होना
जन्मजात दोष: जन्म से ही हड्डियों या जोड़ों में विकृति
आम ऑर्थोपेडिक रोग:
गठिया (Arthritis): यह जोड़ो की सूजन और दर्द का कारण बनता है। यह दो प्रकार का होता है –
ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)
रुमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis)
ऑस्टियोपोरोसिस: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियाँ कमजोर और भंगुर हो जाती हैं।
स्लिप डिस्क: रीढ़ की हड्डी में मौजूद डिस्क जब बाहर की ओर खिसक जाती है तो यह स्थिति बनती है।
फ्रैक्चर (Fracture): किसी भी हड्डी का टूट जाना, चाहे वह छोटा हो या गंभीर, ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी में आता है।
स्कोलियोसिस (Scoliosis): यह रीढ़ की हड्डी का असामान्य वक्र होना है, जो अक्सर किशोरावस्था में देखा जाता है।
ऑर्थोपेडिक में आधुनिक तकनीकें:
आजकल ऑर्थोपेडिक चिकित्सा में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है:
MRI और CT स्कैन से सटीक निदान
कीहोल सर्जरी (Arthroscopy): जिसमें छोटे चीरे से ऑपरेशन किया जाता है
3D प्रिंटिंग तकनीक: कृत्रिम हड्डियाँ या जोड़ बनाने के लिए
रॉबोटिक सर्जरी: अधिक सटीक और कम जटिल सर्जरी के लिए
ऑर्थोपेडिक रोगों से बचाव के उपाय:
संतुलित आहार लें: कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार लें।
नियमित व्यायाम करें: खासकर वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन जोड़ों पर दबाव डालता है।
सही पोश्चर अपनाएं: बैठने, चलने और उठने का तरीका सही रखें।
सुरक्षा का ध्यान रखें: खेलते समय और यात्रा करते समय हेलमेट, गार्ड आदि का उपयोग करें।
भारत में ऑर्थोपेडिक चिकित्सा का विकास:
भारत में ऑर्थोपेडिक चिकित्सा तेजी से विकसित हो रही है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में विश्व स्तरीय ऑर्थोपेडिक अस्पताल मौजूद हैं। मेडिकल टूरिज्म के चलते कई विदेशी नागरिक भी भारत में इलाज कराने आते हैं क्योंकि यहां उत्कृष्ट सेवाएं तुलनात्मक रूप से कम लागत में उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष:
ऑर्थोपेडिक चिकित्सा हमारे शरीर के मूल ढांचे की देखभाल करती है। यह केवल सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य व्यवस्था है। समय पर निदान और उपचार से व्यक्ति एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है। यदि किसी को हड्डियों या जोड़ से संबंधित कोई भी समस्या हो, तो उसे अनदेखा न करें और तुरंत किसी योग्य ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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