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Difference between FII & DII

भारत में FII (Foreign Institutional Investors) और DII (Domestic Institutional Investors) की भूमिका शेयर बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये दोनों ही मार्केट की दिशा तय करने, तरलता और स्थिरता बनाए रखने में प्रभावशाली हैं।
FII (Foreign Institutional Investor)

विदेशी संस्थागत निवेशक होते हैं जो किसी देश के बाहर स्थित होते हैं।

ये निवेशक भारत जैसे देश के वित्तीय बाजारों में विदेशी पूंजी से निवेश करते हैं।

FIIs के उदाहरण हैं विदेश की म्यूचुअल फंड्स, पेंशन फंड्स, बीमा कंपनियां आदि।

FIIs को SEBI के नियमों के तहत पंजीकृत होना पड़ता है।

FIIs आमतौर पर कम से मध्यम अवधि के लिए निवेश करते हैं।

FIIs कंपनी की कुल पेड-इन कैपिटल का अधिकतम 24% तक निवेश कर सकते हैं।

FII का निवेश विदेशी मुद्रा के प्रभाव में आता है और इसे "हॉट मनी" भी कहा जाता है क्योंकि यह तेजी से बाजार में आ-जा सकता है।

DII (Domestic Institutional Investor)

घरेलू संस्थागत निवेशक होते हैं जो उसी देश में स्थित होते हैं जहां निवेश हो रहा है।

DIIs भारतीय म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक, लोकल पेंशन फंड आदि हो सकते हैं।

DIIs दीर्घकालिक (long-term) निवेश अधिक करते हैं।

DIIs के निवेश पर पेड-इन कैपिटल में कोई खास सीमा नहीं होती।

DIIs घरेलू पूंजी का उपयोग करते हैं और बाजार में स्थिरता लाने में मदद करते हैं।

FII की भूमिका:

वैश्विक पूंजी लाते हैं: FII भारत में विदेशी निवेश लेकर आते हैं, जिससे देश के शेयर बाजार में तरलता बढ़ती है और आर्थिक विकास को गति मिलती है।

शॉर्ट-टर्म मार्केट मूवमेंट: इनका निवेश और निकासी ट्रेंड बाज़ार में तेज़ अस्थिरता पैदा कर सकता है। जब FII भारी बिकवाली करते हैं, तो शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है; भारी खरीदारी से तेजी आ सकती है।

वैश्विक विश्वास: FII का निवेश भारत की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है, जिससे सेंटीमेंट मजबूत होता है।

मार्केट ट्रेंड परिवर्तन: वैश्विक घटनाओं और मौद्रिक नीति में बदलाव पर FII जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे निवेश प्रवाह बदलता रहता है।

DII की भूमिका:
स्थिरता और लॉन्ग-टर्म निवेश: DII मुख्य रूप से घरेलू संस्थाएं होती हैं, जो लंबे समय के लिए निवेश करती हैं। ये बाजार में स्थिरता लाती हैं और अस्थिरताओं को संतुलित करती हैं।

मार्केट बैलेंस: जब FII निकासी करते हैं, DII अक्सर खरीदारी करके बाजार को संतुलन प्रदान करते हैं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में विदेशी निवेशक बिकवाल बने थे, तब DII ने रिकॉर्ड निवेश कर बाजार को संभाला था।

घरेलू फंड्स: इनमें भारतीय म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड, बैंक आदि शामिल हैं। इनके निवेश का आधार भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति होती है।

निवेशकों का विश्वास: DII की सक्रियता छोटे और खुदरा निवेशकों को भी बाजार में आत्मविश्वास देती है।

हाल की प्रवृत्तियां:
2025 की पहली तिमाही में FII ने भारत में ₹38,668 करोड़ का शुद्ध निवेश किया, जबकि DII की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर (17.62%) पर पहुंच चुकी है।

FII की बिकवाली से बाजार में गिरावट और अनिश्चितता आई, लेकिन DII ने शेयर खरीदकर मार्केट को संभाला।

विशेषता FII:--

निवेश स्रोत -विदेश
प्राथमिक भूमिका - तरलता, तेजी-मंदी
बाजार पर प्रभाव - शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी
प्रतिक्रिया - वैश्विक घटनाओं पर त्वरित
प्रमुख उदाहरण - गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टैनली

विशेषता DII:--

निवेश स्रोत - भारत
प्राथमिक भूमिका - स्थिरता, संतुलन
बाजार पर प्रभाव - लॉन्ग-टर्म स्थिरता
प्रतिक्रिया - घरेलू नीति/इकोनॉमी आधारित
प्रमुख उदाहरण - LIC, SBI Mutual Fund, HDFC MF

FII और DII दोनों ही भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और विकास के लिए जरूरी हैं। दोनों की गतिविधि निवेशकों के विश्वास, बाजार के ट्रेंड और देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देती है।


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