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DII KYA HAI

DII का पूरा नाम है "Domestic Institutional Investors" अर्थात् घरेलू संस्थागत निवेशक। यह भारत के भीतर स्थित वे संस्थाएं होती हैं जो बड़ी मात्रा में निवेश करती हैं, जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, बैंक, पेंशन फंड आदि। इनका मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार में पूंजी निवेश करना और बाजार को स्थिर बनाए रखना होता है।

DII के बारे में मुख्य बातें:
DII भारत के घरेलू संस्थान होते हैं जो शेयर बाजार में निवेश करते हैं।

इनमें LIC, SBI Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, EPFO जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

ये निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं और आर्थिक/नीति आधारित बदलावों पर तेज प्रतिक्रिया देते हैं।

DII बाजार में स्थिरता बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर जब विदेशी निवेशक (FII) पूंजी निकालते हैं।

वे रिसर्च और विश्लेषण के आधार पर निवेश निर्णय लेते हैं, बाज़ार की तरलता और संतुलन को बनाए रखते हैं।

DII के प्रकार:
म्यूचुअल फंड

बीमा कंपनियां

पेंशन फंड्स

बैंक

वित्तीय संस्थाएं (जैसे NABARD)

DII की भूमिका शेयर बाजार में:
ये बाजार में बड़े निवेश करते हैं जिससे बाजार की स्थिरता और तरलता बढ़ती है।

गिरते बाजार में खरीदारी करके वे बाजार को संतुलित रखते हैं।

इनके निवेश निर्णय आर्थिक और सरकारी नीतियों पर आधारित होते हैं।

वे छोटे निवेशकों को आत्मविश्वास देते हैं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को प्रभावित करते हैं।

संक्षेप में, DII वे घरेलू संस्थान हैं जो भारतीय शेयर बाजार में बड़ी पूंजी लगाकर उसे स्थिर और सुदृढ़ बनाने में मदद करते हैं।
इस प्रकार, DII भारतीय शेयर बाजार की एक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है जो स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए काम करता है। अगर आप शेयर बाजार में निवेश या व्यापार करते हैं तो DII के व्यवहार को समझना महत्वपूर्ण होता है।

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